छावनी

               भारत के संविधान की संघ सूची (अनुसूची VII) की प्रविष्टि 3 के अनुसरण में छावनियों का शहरी स्वशासन तथा उनमें स्थित आवास भारत के संघ के विषय में शामिल है। देश में 62 छावनियां हैं जो छावनी अधिनियम, 1924 (जिसका स्थान छावनी अधिनियम, 2006 ने ले लिया है) के अंतर्गत अधिसूचित हैं। अधिसूचित छावनियों के नगर प्रशासन का समग्र कार्य छावनी बोर्डों के पास है जो कि लोकतांत्रिक निकाय हैं। छावनी का स्टेशन कमांडर बोर्ड का पदेन अध्यक्ष होता है तथा भारतीय रक्षा संपदा सेवा अथवा रक्षा संपदा संगठन का एक अधिकारी मुख्य अधिशासी अधिकारी होता है जो बोर्ड का सदस्य शासकीय प्रतिनिधित्व का सचिव भी होता है। लोकतांत्रिक संरचना के साथ शासकीय प्रतिनिधित्व का सन्तुलन स्थापित करने के लिए बोर्ड में निर्वाचित तथा नामित/पदेन सदस्यों का प्रतिनिधित्व एक समान होता है। छावनी बोर्डों के इस अनुपम ढांचे को सफलतापूर्वक इस बात को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है चूंकि छावनी क्षेत्र मुख्यतः सैन्य आबादी के आवास तथा उनके स्थापनों के लिए है। छावनियां सेना स्टेशनों से बिल्कुल भिन्न हैं। सेना स्टेशन पूरी तरह से सशस्त्र बलों के प्रयोग तथा आवास के लिए हैं तथा इन्हें एक कार्यकारी आदेश के अंतर्गत स्थापित किया गया है। जबकि छावनियां ऐसे क्षेत्र हैं जहां सेना तथा सिविल आबादी दोनों का अस्तित्व है।
         छावनियों की चार श्रेणियां हैं जो किसी छावनी के अंदर रहने वाली आबादी के आकार पर निर्भर हैं। छावनियों में वित्तीय तथा भूमि संबंधी प्रतिबंध, विशेषकर आवासीय तथा वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए उनके अनुज्ञेय प्रयोग के बावजूद भी आज इनमें हरा-भरा क्षेत्र है जो वातावरण के संतुलन को बनाए रखने में मददगार हैं तथा साथ ही वहां के निवासियों को बेहतर नागरिक सुविधाएं प्रदान करती हैं।
         रक्षा संपदा महानिदेशालय रक्षा मंत्रालय का एक अंतर सेवा संगठन है जो सीधे ही छावनी प्रशासन को नियंत्रित करता है। छावनी प्रशासन के लिए रक्षा संपदा महानिदेशालय द्वारा किए जाने वाले कुछ कार्य निम्नलिखित हैं:

छावनी प्रभाग के कार्य तथा कर्तव्य

  • छावनी प्रशासन के विभिन्न पहलूओं से संबंधित नीति बनाना।
  • छावनियों से संबधित विषयों पर रक्षा मंत्रालय को परामर्श देना।
  • सभी छावनियों की वार्षिक प्रशासनिक रिपोर्ट तैयार करना तथा संसद में प्रस्तुत करना।
  • नियमों, विनियमों तथा उपनियमों को क्रियान्वित करना।
  • छावनी बोर्डों के चुनाव करवाना तथा फेर बदल करना।
  • विभिन्न कार्यात्मक मापदंडों पर बोर्डों की मानीटरी, निरीक्षण तथा मार्गदर्शन करना।
  • छावनियों को अनुदान की आवश्यकता का मूल्यांकन करना तथा छावनी बोर्डों को साधारण व विशेष सहायता अनुदान आबंटित करना।
  • सभी छावनी बोर्डों के सेवा प्रभारों का मूल्यांकन करना तथा आबंटित करना।
  • कराधान प्रस्तावों पर कार्रवाई करना।
  • पदों, पर्यवेक्षी व गैर पर्यवेक्षी पदों तथा औद्योगिक विवाद आदि का वर्गीकरण करना।
  • छावनी बोर्ड के कर्मचारियों के कल्याण, बोनस आदि के अनुग्रहपूर्वक भुगतान से संबंधित विषय।